अंकिता पटेल
पॉलिएस्टर और नायलॉन जैसे सिंथेटिक कपड़े कभी-कभी त्वचा से चिपकने लगते हैं, जिसके पीछे स्थैतिक विद्युत, घर्षण और नमी जैसे कारण होते हैं।
कपड़ा त्वचा या दूसरे कपड़े से रगड़ता है तो बहुत छोटे विद्युत आवेश बन सकते हैं, जिससे कपड़ा शरीर की ओर खिंचने लगता है।
पॉलिएस्टर और नायलॉन जैसे रेशे विद्युत के कमजोर चालक होते हैं, इसलिए घर्षण से बना आवेश आसानी से खत्म नहीं होता और कपड़े में जमा रह सकता है।
हवा में नमी कम होने पर विद्युत आवेश के निकलने का रास्ता कम हो जाता है, इसलिए कपड़ों में स्थैतिक चिपकाव ज्यादा महसूस हो सकता है।
चलते, बैठते या कपड़ों की परतें एक-दूसरे से रगड़ती हैं तो आवेश बनने की संभावना बढ़ती है और हल्का कपड़ा त्वचा या दूसरे कपड़े से चिपक सकता है।
गर्म और उमस भरे मौसम में कुछ सिंथेटिक कपड़े कम नमी सोखते हैं, जिससे पसीना त्वचा और कपड़े के बीच बना रह सकता है और कपड़ा चिपचिपा महसूस हो सकता है।
पॉलिएस्टर की नमी सोखने की क्षमता कम होती है और उसकी विद्युत प्रकृति के कारण स्थैतिक आवेश जमा होने की संभावना रहती है।
कपड़े की बनावट, रेशों का मिश्रण, सतह, नमी और इस्तेमाल किए गए विशेष उपचार के कारण अलग-अलग सिंथेटिक कपड़ों में चिपकने की मात्रा अलग हो सकती है।
सूती रेशे नमी को सिंथेटिक रेशों की तुलना में बेहतर तरीके से ग्रहण करते हैं, इसलिए सामान्य परिस्थितियों में उनमें स्थैतिक आवेश के जमा होने की समस्या कम हो सकती है।
बहुत ज्यादा चिपकने पर सूती परत पहनना, कपड़ों में प्राकृतिक रेशों का मिश्रण चुनना और कपड़ों को अत्यधिक सुखाने से बचना मददगार हो सकता है।