Pitru Paksha 2026: पितृ पक्ष में क्यों किया जाता है श्राद्ध? जानें 10 जरूरी बातें

अंकिता पटेल

पितृ पक्ष क्या है?

पितृ पक्ष हिंदू परंपरा में पूर्वजों को याद करने और उनके सम्मान में श्राद्ध, तर्पण व पिंडदान जैसे कर्म करने की अवधि मानी जाती है।

पितृ पक्ष क्या है? | सोर्स- सोशल मीडिया

2026 में कब है पितृ पक्ष?

2026 में पितृ पक्ष की शुरुआत 27 सितंबर से मानी जा रही है और इसका समापन 10 अक्टूबर को सर्वपितृ अमावस्या के साथ होगा। पंचांग और स्थान के अनुसार तिथियों में अंतर संभव है।

2026 में कब है पितृ पक्ष? | सोर्स- सोशल मीडिया

श्राद्ध का क्या अर्थ है?

श्राद्ध में पूर्वजों के प्रति श्रद्धा और सम्मान के भाव से धार्मिक कर्म किए जाते हैं। परिवार अपनी परंपरा के अनुसार तर्पण, पिंडदान और भोजन आदि अर्पित करता है।

श्राद्ध का क्या अर्थ है? | सोर्स- सोशल मीडिया

मृत्यु तिथि के अनुसार श्राद्ध

परंपरा के अनुसार जिस तिथि को किसी पूर्वज का निधन हुआ हो, उसी तिथि पर उनका श्राद्ध किया जाता है। अलग-अलग तिथियों के लिए अलग श्राद्ध माने जाते हैं।

मृत्यु तिथि के अनुसार श्राद्ध | सोर्स- सोशल मीडिया

तर्पण क्यों किया जाता है?

तर्पण में जल आदि अर्पित करके पूर्वजों का स्मरण किया जाता है। इसे पितरों के प्रति सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त करने वाली धार्मिक परंपरा माना जाता है।

तर्पण क्यों किया जाता है? | सोर्स- सोशल मीडिया

पिंडदान की परंपरा

पिंडदान श्राद्ध कर्म का एक महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। पारंपरिक रूप से चावल, तिल और अन्य सामग्री से पिंड बनाए जाते हैं। अलग-अलग क्षेत्रों में इसकी परंपराएं अलग हो सकती हैं।

पिंडदान की परंपरा | सोर्स- सोशल मीडिया

कौए को भोजन कराने की मान्यता

पितृ पक्ष में कौए को भोजन कराने की परंपरा कई हिंदू परिवारों में प्रचलित है। धार्मिक मान्यता में कौए को पितरों से जुड़ा प्रतीक माना जाता है।

कौए को भोजन कराने की मान्यता | सोर्स- सोशल मीडिया

सर्वपितृ अमावस्या का खास महत्व

पितृ पक्ष की अंतिम तिथि सर्वपितृ अमावस्या कहलाती है। जिन पूर्वजों की श्राद्ध तिथि ज्ञात न हो, उनके लिए इस दिन श्राद्ध करने की परंपरा कई परिवारों में मानी जाती है।

सर्वपितृ अमावस्या का खास महत्व | सोर्स- सोशल मीडिया

क्षेत्र के अनुसार बदलती हैं परंपराएं

पितृ पक्ष की विधियां पूरे भारत में एक जैसी नहीं हैं। कहीं पिंडदान को विशेष महत्व दिया जाता है, तो कहीं तर्पण प्रमुख होता है। भोजन और पूजा की परंपराओं में भी क्षेत्रीय अंतर हो सकती हैं।

क्षेत्र के अनुसार बदलती हैं परंपराएं | सोर्स- सोशल मीडिया

पितृ पक्ष का मूल संदेश

पितृ पक्ष केवल धार्मिक अनुष्ठानों तक सीमित नहीं है। यह परिवार की पीढ़ियों को याद करने, उनके योगदान के प्रति कृतज्ञता जताने और परंपराओं को आगे बढ़ाने का अवसर भी माना जाता है।

पितृ पक्ष का मूल संदेश | सोर्स- सोशल मीडिया

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