सिमरन सिंह
फोन में दिखने वाला बैटरी प्रतिशत एक अनुमान होता है। सिस्टम वोल्टेज, तापमान, इस्तेमाल और बैटरी की स्थिति देखकर यह प्रतिशत तय करता है।
कंपनियां बैटरी में कुछ रिजर्व पावर रखती हैं। इसका मकसद फोन को अचानक बंद होने से बचाना और बैटरी को सुरक्षित रखना होता है।
इसका कोई फिक्स टाइम नहीं है। नॉर्मल इस्तेमाल में फोन कुछ मिनट से लेकर 10–15 मिनट तक चल सकता है। स्टैंडबाय में यह समय और बढ़ सकता है।
आखिरी प्रतिशत पर फोन का Battery Management System एक्टिव हो जाता है। यह बैटरी की खपत कम करने के लिए कुछ फीचर्स और बैकग्राउंड एक्टिविटी को सीमित कर सकता है।
हर फोन में 1% बैटरी का अनुभव अलग हो सकता है। पुरानी या कमजोर बैटरी में पावर तेजी से गिर सकती है, जिससे फोन अचानक स्विच ऑफ हो जाता है।
पुरानी बैटरी का खेल
लिथियम-आयन बैटरी समय के साथ अपनी क्षमता खोती है। इसी वजह से पुराने फोन में कभी-कभी 20–30% बैटरी पर भी फोन बंद हो सकता है।
अगर चार्जर नहीं है तो तुरंत ये काम करें:
ब्राइटनेस कम करें
मोबाइल डेटा, Wi-Fi और Bluetooth बंद करें
बैकग्राउंड ऐप्स बंद करें
जरूरत हो तो Airplane Mode ऑन करें
फोन ज्यादा गर्म होने पर बैटरी तेजी से खर्च हो सकती है। 1% बैटरी बचाने के लिए गेमिंग, वीडियो और दूसरे भारी कामों से बचें और फोन को ठंडा रखें।
हर बार बैटरी को 0 या 1% तक पहुंचाना जरूरी नहीं है। लंबे समय तक बेहतर बैटरी हेल्थ के लिए आमतौर पर 20–80% के बीच चार्ज रखना बेहतर माना जाता है। कभी-कभार 1% तक पहुंचना बड़ी समस्या नहीं, लेकिन इसे रोज की आदत न बनाएं।