अंकिता पटेल
नवरात्रि की सजावट पूजा के साथ खत्म हो जाए, जरूरी नहीं। कई चीजें दशहरा और दिवाली तक भी घर की शोभा बढ़ाती हैं। शुरुआत करें तोरण से: मोतियों, कपड़े या कृत्रिम पत्तों वाला तोरण सुंदर लगता है।
पीली या गर्म सफेद एलईडी झालरें खिड़की, बालकनी या दीवार पर लगाएँ। इनसे शाम को घर में उत्सव जैसा माहौल बनता है। बिजली की खपत कम रहती है और ये दिवाली तक भी काम आती हैं।
पीतल या काँसे की चौड़ी उरली में पानी भरकर उसमें फूल की पंखुड़ियाँ और तैरती मोमबत्तियाँ सजाएँ। यह बैठक या प्रवेश द्वार की मेज पर बेहद आकर्षक लगती है। पंखुड़ियाँ रोज बदलते रहें।
पीतल या काँसे की चौड़ी उरली में पानी भरकर उसमें फूल की पंखुड़ियाँ और तैरती मोमबत्तियाँ सजाएँ। यह बैठक या प्रवेश द्वार की मेज पर बेहद आकर्षक लगती है। पंखुड़ियाँ रोज बदलते रहें।
असली फूल दो-तीन दिन में सूख जाते हैं, जबकि कृत्रिम गेंदे और गुलाब की मालाएँ लंबे समय तक चलती हैं। इन्हें दरवाजे, खिड़की, सीढ़ी की रेलिंग या पूजा स्थल के पास लगाएँ।
पीतल के दीपक, घंटियाँ, हाथी या सजावटी कलश कम जगह में भी भारतीय परंपरा का सुंदर रंग भरते हैं। इन्हें नींबू और नमक से साफ करके चमकदार रखा जा सकता है।
रंगोली स्टिकर, रंगीन ऐक्रेलिक या लकड़ी की रंगोली और रंगोली स्टेंसिल बार-बार इस्तेमाल हो सकते हैं। इन्हें रोज बनाने की मेहनत से बचते हुए आप दरवाजे पर सुंदर और व्यवस्थित डिजाइन सजा सकते हैं।
मधुबनी, वारली या पिछवाई शैली की पेंटिंग और फ्रेम दीवार को पारंपरिक और कलात्मक रूप देते हैं। बैठक की एक दीवार पर एक-दो चुनिंदा चित्र लगाएँ। यह सजावट त्योहार के बाद भी घर की शोभा बढ़ाती रहती है।
जरदोजी, शीशे के काम, बनारसी या गोटा-पट्टी वाले कुशन कवर और टेबल रनर ड्रॉइंग रूम को पारंपरिक पर शानदार रंग देते हैं। इन्हें अलग-अलग मौसम में बदला भी जा सकता है।
धातु या काँच की लालटेन में एलईडी मोमबत्ती रखकर बालकनी या सीढ़ी के पास सजाएँ। साथ में तुलसी या मनी प्लांट जैसे पौधे रखने से घर में ताजगी और सुकून भी आता है।