सुनीता पांडे
अगर आप घंटों योग नहीं कर सकते हैं तो योगासनों से खुद को आसानी से फिट रख सकते हैं। इससे रोग प्रतिरोधक क्षमता में सुधार होता है।
अपान वायु मुद्रा से शरीर में ऊर्जा का संचार होता है और इन योगासनों से चिंता, तनाव,अवसाद का खतरा नहीं रहता है।
अपान वायु मुद्रा को नियमित 4 से 5 मिनट तक करने से आपको हृदय संबंधी रोग होने की संभावना कम हो जाती है और हार्ट अटैक का खतरा रहता है।
अपान वायु मुद्रा से हाई बीपी की समस्या को कम होती है और नसों से जुड़े संकुचन को दूर किया जा सकता है।
अपनी वायु मुद्रा से वात, कफ और पित्त को संतुलित किया जा सकता हैं। इस मुद्रा से एसिडिटी, पाचन में सुधार और पेट संबंधित समस्या दूर हो जाती है।
अपान वायु मुद्रा करने के लिए सबसे पहले सुख आसन में बैठें, इसके बाद हथेलियों को ऊपर की ओर रखतें हुए घुटनों पर रखें।
अब, आप इंडेक्स फिंगर यानी पहली उंगली को मोड़कर अंगूठे के छोर (निचले हिस्से) पर रखें। इस दौरान अंगूठे को मोड़ें।
इसके बाद मीडिल और रिंग फिंगल को अंगूठ के टिप पर छुआएं। इसके साथ ही, आप लिटिल फिंगर को बाहर की ओर फैलाएं।
मुद्रा को करते समय आंखें बंद रखें और गहरी सांस लें। पूरा ध्यान सांसों पर रखें।
शुरुआत में 3-5 मिनट तक इस मुद्रा को करें, बाद में इस पोजीशन को आप 10 से 15 मिनट तक कर सकते हैं।
अपान वायु मुद्रा से शारीरिक और मानसिक शांति मिलती है।