अंकिता पटेल
इस साल करवा चौथ का व्रत 29 अक्टूबर, गुरुवार को रखा जाएगा। इस दिन सुहागिन महिलाएं पति की लंबी उम्र और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना के साथ व्रत रखती हैं।
करवा चौथ कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाया जाता है। 2026 में चतुर्थी तिथि 29 अक्टूबर को देर रात लगभग 1:06 बजे शुरू होकर रात 10:09 बजे समाप्त होगी।
करवा चौथ पर सरगी खाने की परंपरा है। इसे आमतौर पर सूर्योदय से पहले सास अपनी बहू को देती हैं। सरगी में फल, सूखे मेवे और पौष्टिक खाद्य पदार्थ शामिल किए जा सकते हैं।
परंपरागत रूप से करवा चौथ का व्रत सूर्योदय से चंद्र दर्शन तक रखा जाता है। कई महिलाएं इस दौरान अन्न और पानी ग्रहण नहीं करतीं।
करवा चौथ पर शाम के समय पूजा की जाती है। महिलाएं साफ स्थान पर पूजा की चौकी सजाकर भगवान शिव, माता पार्वती, भगवान गणेश और करवा माता की आराधना करती हैं।
पूजा के समय बार-बार सामान ढूंढने से बचने के लिए सामग्री पहले ही तैयार कर लें। इसके लिए पूजा की थाली, करवा, जल, दीपक, रोली, अक्षत, फूल, मिठाई और छलनी रख सकती हैं।
करवा चौथ की पूजा में व्रत कथा सुनने या पढ़ने की परंपरा है। कथा के अलग-अलग प्रचलित रूप मिलते हैं, जिनमें व्रत, श्रद्धा और पति-पत्नी के रिश्ते से जुड़ी मान्यताओं का वर्णन होता है।
करवा चौथ की पूजा का शुभ समय शहर और स्थानीय पंचांग के अनुसार देखना चाहिए। नई दिल्ली में 2026 के लिए एक प्रचलित पंचांग के अनुसार पूजा का समय शाम 5:38 से 6:56 बजे तक बताया गया है।
करवा चौथ पर चांद निकलने के बाद महिलाएं छलनी से चंद्र दर्शन करती हैं और चंद्रमा को अर्घ्य देती हैं। कई परिवारों में इसके बाद पति का चेहरा छलनी से देखने की परंपरा भी निभाई जाती है।
करवा चौथ पर चंद्र दर्शन व्रत का सबसे महत्वपूर्ण पड़ाव है। 2026 में नई दिल्ली के लिए चंद्रोदय का समय लगभग रात 8:17 बजे बताया गया है, जबकि अन्य शहरों में चांद अलग समय पर दिखाई दे सकता है।