'राधा अष्टमी' के बिना अधूरा है जन्माष्टमी व्रत, ऐसे करें राधा-कृष्ण की पूजा, मिलेगा सौभाग्य!

सुनीता पांडे

राधा अष्टमी भाद्रपद मास की शुक्ल पक्ष की अष्टमी की तिथि को मनायी जाती है। इसे राधा अष्टमी भी कहा जाता है।

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यह अष्टमी जन्माष्टमी के 15 दिन बाद होती है। इस साल राधा अष्टमी 23 सितंबर को मनाई जाएगी।

Lord Radha Krishna

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पंचांग के अनुसार इस वर्ष भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि 22 सितंबर को दोपहर 1:35 बजे से शुरू होगी और 23 सितंबर को दोपहर 12:17 बजे तक रहेगी। इसलिए राधा अष्टमी का व्रत उदया तिथि के अनुसार 23 सितंबर, शनिवार को रखा जाएगा।

idols of Hindu deities Radha Krishna

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माना जाता है कि राधा रानी का जन्म इसी दिन हुआ था। इसलिए देश के अन्य जगहों पर श्रद्धालु त्योहार को बड़े ही उत्साह से मनाते हैं।

wall art of Hindu God and Goddess Krishna and Radha in a temple

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राधा रानी की पूजा के बगैर श्रीकृष्ण भगवान की भक्ति अधूरी मानी जाती है।

lord krishna sculpture image hd.

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शास्त्रों के अनुसार जो व्यक्ति जन्माष्टमी का व्रत रखता है और राधा अष्टमी का व्रत नहीं करता, उसे जन्माष्टमी का पूर्ण फल प्राप्त नहीं होता है।

Statue of Radha Krishna

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इस व्रत के लिए पूजा घर में चौकी पर राधा रानी और श्रीकृष्ण की युगल जोड़ी का चित्र या प्रतिमा स्थापित करें।

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राधा कृष्ण की पूजा करें और अंत में राधा चालीसा का पाठ करें। शाम को आरती के बाद प्रसाद ग्रहण करें।

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पूजा के बाद व्यक्ति उपवास रख सकता है, या तो एक बार सात्विक भोजन ले सकता है।

idols of Hindu deities Radha Krishna

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दूसरे दिन श्रद्धापूर्वक सुहागिन महिलाओं को या ब्राह्मणों को भोजन कराएं तथा यथासंभव दक्षिणा प्रदान करें।

Lord Radha Krishna

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