सुनीता पांडे
कलाशा जनजाति पाकिस्तान की अफगानिस्तान से लगी सीमा पर रहती है। जिनके रीति-रिवाज और संस्कृति पाकिस्तान से बिल्कुल अलग हैं।
इस जनजाति की आबादी महज 04 हजार है, यहां की औरतों को भरपूर आजादी मिली है।
यहां पर महिलाएं गैर मर्द पसंद आने पर अपनी पहली शादी को तोड़ देती हैं।
कलाशा समुदाय की औरतों को भरपूर आजादी मिली है। यहां औरतें बुर्का नहीं बल्कि कलरफुल कपड़े पहनती हैं। वे अपने फैसले खुद लेती हैं और शादी भी अपनी मनमर्जी से ही करती है।
अपनी पसंद की शादी करने के बाद भी यहां की महिलाओं को अगर कोई गैर मर्द पसंद आ जाए तो वे अपनी शादी तोड़ देती हैं।
यहां किसी औरतों को किसी दूसरे मर्द के साथ संबंध बनाने की अनुमति है।
यहां पर त्योहारों में औरतें और मर्द सभी साथ मिलकर शराब पीते हैं।
कलाशा समुदाय की परंपरा अन्य जातियों और समुदाय से अलग है। यहां पर किसी की मौत होने पर गम नहीं बल्कि खुशी मनाई जाती है।
क्रिया कर्म के दौरान लोग नाचते-गाते हैं। वे मानते हैं कि कोई ऊपर वाले की मर्जी से यहां आया और फिर उसी के पास लौट गया।
एक तरफ इस समुदाय के लोग महिलाओं को आजादी देते हैं, तो दूसरी तरफ पीरियड्स के दौरान उन्हें घर से बाहर रहने को मजबूर किया जाता है।
लोगों की ऐसी मान्यता है कि इस दौरान महिलाओं के घर में रहने या परिवार के लोगों को छूने से ईश्वर नाराज हो जाते है और इससे बाढ़ या अकाल जैसे हालात हो सकते हैं।