अंकिता पटेल
सोशल मीडिया पर प्लास्टिक या नकली अंडों की बातें अक्सर सामने आती हैं। लेकिन FSSAI के अनुसार पूरी तरह कृत्रिम अंडे को प्राकृतिक अंडे जैसा बनाने की बात एक मिथक है।
अंडा खरीदते समय उसका खोल ध्यान से देखें। साफ और बिना दरार वाला अंडा चुनना बेहतर है। टूटे या क्षतिग्रस्त खोल वाले अंडे को इस्तेमाल करने से बचना चाहिए।
अंडा तोड़ने के बाद उसकी गंध जांचना आसान तरीका है। अगर कच्चे अंडे से असामान्य या सड़ी हुई तेज गंध आए, तो उसे खाने से बचें। खराब अंडे में गंध और बनावट बदल सकती है।
ताजा अंडे में सफेदी आमतौर पर अधिक गाढ़ी होती है और जर्दी अच्छी तरह बनी रहती है। समय के साथ अंडे की सफेदी पतली हो सकती है और जर्दी अधिक आसानी से फैल सकती है।
सफेदी का हल्का धुंधला दिखना अपने आप में खराबी का संकेत नहीं है। USDA के अनुसार धुंधली सफेदी ताजगी का संकेत हो सकती है। वहीं गुलाबी रंग की सफेदी खराब होने का संकेत हो सकती है।
जर्दी (योक) का रंग मुर्गी के आहार के अनुसार हल्के पीले से गहरे पीले तक हो सकता है। इसलिए केवल जर्दी का रंग देखकर अंडे को नकली या खराब बताना सही नहीं है।
पानी में अंडा डालकर उसके तैरने या डूबने से उसकी उम्र का अंदाजा लगाने की घरेलू विधि प्रचलित है, लेकिन इसे असली या नकली पहचानने का प्रमाणित टेस्ट नहीं मानना चाहिए।
FSSAI के अनुसार अंडों की गुणवत्ता पर तापमान और भंडारण अवधि का असर पड़ता है। अंडों को ठंडी जगह या रेफ्रिजरेटर में उचित तरीके से रखना उनकी गुणवत्ता बनाए रखने में मदद करता है।
खोल में दरार होने पर बैक्टीरिया के प्रवेश का जोखिम बढ़ सकता है। इसलिए खरीदते समय साफ और बिना दरार वाले अंडे चुनें। FSSAI भी गंदे या टूटे अंडों के इस्तेमाल से बचने की सलाह देता है।
अंडे को प्लास्टिक बताने वाले वायरल घरेलू दावों पर भरोसा करने के बजाय उसकी ताजगी, गंध, खोल और भंडारण पर ध्यान दें। संदिग्ध या खराब दिखने वाले अंडे को खाने के बजाय फेंक देना सुरक्षित विकल्प है।