सिमरन सिंह
भगवान राम ने राक्षसों को खत्म कर धर्म की स्थापना की।
जब राम जी को लगा की उनकी लीला समाप्त होने वाली है तो वह सर्तक हो गए।
यमराज का दूत भगवान राम के पास आया और उन्हे स्वर्ग वापस लौटने के समय के बारें में बताया
राम ने इसे सहर्ष स्वीकार किया, क्योंकि उन्होंने मानव रूप में अपना कर्तव्य पूरा कर लिया था।
लक्ष्मण ने यमराज की एक शर्त के बाद प्राणों की आहुति दी। लक्ष्मण की मृत्यु से दुखी होकर भगवान राम ने भी जीवन समाप्त किया।
भगवान राम ने अपने भाइयों और अनुयायियों से विदाई ली और सरयू नदी के किनारे गुप्तार घाट की ओर प्रस्थान किया।
राम ने सरयू नदी में प्रवेश कर जल समाधि ली, जहां वे नदी की लहरों में अदृश्य हो गए