सुनीता पांडे
शुरुआती दिनों में वह भी अपने पिता के साथ ठेले पर जूस बेचते थे और फिर वहीं से उन्होंने कैसेट बेचने की शुरुआत भी की।
बिजनेस बड़ा होने के बाद ‘कैसेट किंग’ ने मुंबई और बॉलीवुड का रुख कर लिया।
उन्होंने अपनी कंपनी सुपर कैसेट इंडस्ट्रीज लिमिटेड के तहत ही टी-सीरीज लेबल की स्थापना की और देखते ही देखते अपने प्रतिद्वंदियों को पटखनी दे दी।
टी-सीरीज के इस उभार को उनके कंपीटीटर हजम नहीं कर पा रहे थे और उन्होंने गुलशन कुमार को रास्ते से हटाने की साजिशें शुरू कर दी।
साल 1997 में गुलशन कुमार ने देश में सबसे ज्यादा इनकम टैक्स भरा था। तब से ही वो अंडरवर्ल्ड के निशाने पर आ गए।
गैंगस्टर अबू सलेम ने उन्हें फोन कर हर महीने 5 लाख का हफ्ता देने को कहा, लेकिन गुलशन कुमार ने इससे साफ इनकार कर दिया।
इस इनकार के बाद अबू सलेम ने गुलशन कुमार को मारने की तैयारी कर ली, ताकि बॉलीवुड में उसकी दहशत बनी रहे।
जैसे ही गुलशन मंदिर से बाहर निकले उन पर गोलियों की बौछार हो गई। लेकिन गुलशन कुमार को केवल दो गोलियां लगी और वो भागकर सामने वाले टॉयलेट में घुस गए। हत्यारे ने उन्हें वहां भी नहीं बक्सा और टॉयलेट में घुसकर उनकी हत्या कर दी।
गुलशन कुमार को 16 गोलियां लगी और उन्होंने वहीं दम तोड़ दिया।
इस घटना ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया, लेकिन माफिया अपने मकसद में कामयाब रहे और बॉलीवुड पर उनका सिक्का जम गया।
गुलशन कुमार ने टी-सीरीज के जरिए जो सल्तनत कायम की, उसे उनके बेटे भूषण कुमार अब आगे बढ़ाने में जुटेर हते हैं।