सिमरन सिंह
Facebook, Instagram, Google और X के Algorithm टेक कंपनियां खुद बनाती हैं। सरकार तय नहीं करती कि कौन-सी पोस्ट सबसे ऊपर दिखेगी।
सरकार कानून और नियम बनाकर सोशल मीडिया कंपनियों को नियंत्रित करती है। कंपनियों को अपनी नीतियां और कंटेंट सिस्टम बदलने पड़ सकते हैं।
सरकारें फर्जी खबरों, हेट स्पीच और डीपफेक पर कार्रवाई की मांग कर सकती हैं। IT Rules के तहत कंपनियों की जवाबदेही तय होती है।
हां, कुछ मामलों में। IT Act की धारा 69A के तहत सरकार कंटेंट ब्लॉक करने का आदेश दे सकती है। यह राष्ट्रीय सुरक्षा और सार्वजनिक व्यवस्था जैसे मामलों में लागू होता है।
कुछ मामलों में कंपनियों को आपत्तिजनक कंटेंट तय समय में हटाना पड़ता है। कानूनी आदेश मिलने पर कार्रवाई जरूरी हो सकती है।
सरकार तय नहीं करती:
कौन-सी पोस्ट वायरल होगी?
किसे सबसे ऊपर दिखाया जाएगा?
किस यूजर को क्या दिखेगा?
ये फैसले प्लेटफॉर्म के Algorithm लेते हैं।
कई देश यूजर्स को Feed पर ज्यादा नियंत्रण देने की कोशिश कर रहे हैं। ऑस्ट्रेलिया में यूजर्स को सिर्फ Follow किए गए लोगों की पोस्ट देखने का विकल्प देने का प्रस्ताव है।
अब फोकस कंटेंट हटाने के साथ Algorithm की पारदर्शिता पर भी है। टेक कंपनियों को कंटेंट मॉडरेशन के लिए जवाबदेह बनाने की कोशिश हो रही है।
सीधा Algorithm Control: नहीं।
कानूनी Control: हां।
सरकार कोड नहीं लिखती, लेकिन कंटेंट, यूजर सेफ्टी और पारदर्शिता के नियम तय कर सकती है।