प्रमोद यादव
मेट्रो और ट्रैक से जुड़े सेंसर लगातार डेटा जुटाते हैं। यही जानकारी ऑटोमेटिक सिस्टम को मेट्रो की स्थिति और आसपास के हालात समझने में मदद करती है।
कैमरा, सेंसर और अन्य detection systems ट्रैक, सिग्नल और आसपास की परिस्थितियों की जानकारी लेते हैं। इससे सिस्टम को आगे की स्थिति समझने में मदद मिलती है।
ऑटोमेटिक सिस्टम को ट्रैक और सिग्नलिंग से लगातार जानकारी मिलती है। किसी असामान्य स्थिति का पता चलने पर सुरक्षा प्रणालियां निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार प्रतिक्रिया कर सकती हैं।
मेट्रो के अलग-अलग उपकरणों से मिलने वाला डेटा मॉनिटर किया जाता है। इससे सिस्टम में होने वाले बदलाव या संभावित समस्या के संकेतों को समय रहते पहचानने में मदद मिल सकती है।
पहिए, ब्रेक और दूसरे जरूरी उपकरणों की स्थिति से जुड़े डेटा की निगरानी की जाती है। इससे रखरखाव टीम को यह समझने में मदद मिलती है कि किस हिस्से पर जांच या सर्विस की जरूरत हो सकती है।
इसे predictive maintenance कहा जाता है। पुराने डेटा और मौजूदा सेंसर डेटा को देखकर सिस्टम संभावित खराबी के संकेत सामने ला सकता है।
मेट्रो से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी केंद्रीय सिस्टम तक पहुंचती है। कंट्रोल सेंटर में ऑपरेटर और सिस्टम मेट्रो के संचालन तथा संबंधित तकनीकी जानकारी की निगरानी करते हैं।
केंद्रीय नियंत्रण कक्ष से मेट्रो और उसके सिस्टम की निगरानी की जा सकती है। किसी तकनीकी या संचालन संबंधी स्थिति में निर्धारित सुरक्षा और नियंत्रण प्रक्रियाएं लागू की जाती हैं।
ड्राइवरलेस ऑपरेशन के पीछे ऑटोमेटिक मेट्रो कंट्रोल, सिग्नलिंग, सेंसर, निगरानी और केंद्रीय नियंत्रण जैसी कई प्रणालियां होती हैं।