सुनीता पांडे
योग के माध्यम से मन और शरीर संतुलन को साधने की कोशिश में खुद को योग की क्रियाओं में लीन कर देना होता है।
भारत में हठ योग और चीन में ताओवादी योग प्राचीन काल से प्रचलित है, इन्हीं दोनों योग पद्धति से ही यिन योग की शुरुआत हुई थी।
यिन योग शांत और धीमी गति से किया जाने वाला योग है। इस योग में योगा मैट या फर्श पर निष्क्रिय रूप से शरीर के निचले हिस्से जैसे कूल्हों, श्रोणि, भीतरी जांघों, रीढ़ की हड्डी के निचले हिस्से पर जोर दिया जाता है।
मन और शरीर को संतुलित और शांत रखने के लिए इस योग का नियमित अभ्यास बेहद फायदेमंद माना जाता है।
शरीर में रक्त के प्रवाह को संतुलित करता है और इसका नियमित अभ्यास चिंता, तनाव और अवसाद जैसी समस्याओं को कम करने में बहुत उपयोगी है।
शरीर को मजबूत और लचीला बनाने में यह योग लाभकारी माना जाता है।
शरीर के निचले और आंतरिक अंगों को स्वस्थ और मजबूत बनाता है।
यिन योग के नियमित अभ्यास से व्यक्ति शारीरिक और मानसिक रूप से अधिक सक्रिय होता है और आत्मविश्वास में वृद्धि होती है।
शरीर की ऊर्जा और जीवन शक्ति को बढ़ाने का काम करता है।