सिमरन सिंह
टीवी, फ्रिज, AC, वॉशिंग मशीन से लेकर स्मार्टफोन तक अब EMI पर खरीदना आम है। No Cost EMI ने महंगी चीजों की खरीदारी को और आसान बना दिया है।
इसमें आमतौर पर ग्राहक से अलग से ब्याज नहीं लिया जाता। कई मामलों में कंपनी या दुकानदार बैंक/फाइनेंस कंपनी को ब्याज की रकम सब्सिडी के तौर पर देता है।
No Cost EMI का मतलब यह नहीं कि कोई दूसरा चार्ज नहीं लगेगा। प्रोसेसिंग फीस, टैक्स या अन्य शुल्क ग्राहक से लिए जा सकते हैं।
कभी-कभी EMI ऑफर लेने पर वही छूट नहीं मिलती जो कैश या बिना EMI खरीदने पर मिल सकती है। इसलिए सिर्फ EMI देखकर फैसला न करें।
खरीदारी से पहले चेक करें: कैश प्राइस + डिस्काउंट बनाम EMI की कुल लागत दोनों में कितना अंतर है, यह समझना जरूरी है।
EMI लेने से पहले यह भी देखें कि लोन कौन सा बैंक या NBFC दे रहा है। संबंधित कंपनी का RBI के पास रजिस्ट्रेशन चेक करना जरूरी है।
EMI के लिए डॉक्यूमेंट और डिजिटल जानकारी मांगी जा सकती है। लेकिन ग्राहक को सिर्फ जरूरी जानकारी और जरूरी परमिशन ही देनी चाहिए।
EMI से महंगी चीज खरीदना आसान हो जाता है, लेकिन हर महीने एक नई वित्तीय जिम्मेदारी जुड़ती है। अगर सामान की तुरंत जरूरत नहीं है, तो खरीदारी टालना भी एक विकल्प है।
समय पर EMI चुकाने से क्रेडिट हिस्ट्री बनाने में मदद मिल सकती है। वहीं देरी होने पर एक्स्ट्रा चार्ज और क्रेडिट स्कोर पर असर पड़ सकता है। इसलिए No Cost EMI लेने से पहले पूरी लागत जरूर समझें।