रीता राय सागर
बोतलबंद पानी सुविधाजनक जरूर है, लेकिन शोधों ने इसमें बेहद छोटे माइक्रोप्लास्टिक और नैनोप्लास्टिक कणों की मौजूदगी को लेकर चिंता बढ़ाई है।
माइक्रोप्लास्टिक्स प्लास्टिक के बेहद छोटे कण होते हैं। ये बड़े प्लास्टिक के टूटने या अलग-अलग प्लास्टिक उत्पादों से निकलकर पानी और भोजन तक पहुंच सकते हैं।
पानी के संपर्क में आने वाली प्लास्टिक बोतल और उसकी पैकेजिंग से छोटे प्लास्टिक कण निकल सकते हैं। बोतल को दबाने, घर्षण और लंबे समय तक रखने से पानी पर भी असर पड़ता है।
नैनोप्लास्टिक्स माइक्रोप्लास्टिक्स से भी छोटे कण होते हैं। एक अध्ययन में बोतलबंद पानी के एक लीटर में औसतन करीब 2.4 लाख प्लास्टिक कण पाए गए, जिनमें बड़ी संख्या नैनोप्लास्टिक्स की थी।
माइक्रोप्लास्टिक्स के इंसानी शरीर में पहुंचने के प्रमाण मिले हैं, लेकिन इनके दीर्घकालिक स्वास्थ्य प्रभावों को लेकर अभी वैज्ञानिक शोध जारी है।
प्लास्टिक की बोतल को लंबे समय तक तेज धूप या ज्यादा गर्म जगह पर रखना सही नहीं है। गर्मी और लंबे समय तक स्टोरेज से पैकेजिंग से कुछ पदार्थ पानी में जाने का जोखिम बढ़ता है।
एक बार इस्तेमाल होने वाली प्लास्टिक बोतलों को दोबारा इस्तेमाल करना स्वच्छता के लिहाज से भी अच्छा विकल्प नहीं है। बोतल में गंदगी और बैक्टीरिया जमा हो सकते हैं।
रोजमर्रा के इस्तेमाल के लिए स्टील, कांच या अच्छी गुणवत्ता वाली बोतलों का इस्तेमाल करें और बोतल को नियमित रूप से साफ करना भी जरूरी है।
जरूरत पड़ने पर बोतलबंद पानी खरीदें तो सीलबंद बोतल लें और उसे धूप या गर्म कार में लंबे समय तक न छोड़ें। बोतल की पैकेजिंग और स्टोरेज की स्थिति पर भी ध्यान दें।
माइक्रोप्लास्टिक्स पर शोध लगातार आगे बढ़ रहा है। फिलहाल सबसे व्यावहारिक कदम है प्लास्टिक का अनावश्यक इस्तेमाल कम करना, पानी को सही तरीके से स्टोर करना और सुरक्षित विकल्पों का इस्तेमाल बढ़ाना।