अपूर्वा नायक
साल 1971 में आयी फिल्म आनंद में सुपरस्टार राजेश खन्ना मुख्य भूमिका में थे, लेकिन डॉ. भास्कर बनर्जी (बाबू मोशाय) के रूप में अमिताभ के संजीदा अभिनय ने सभी का ध्यान खींचा।
साल 1973 में आयी फिल्म जंजीर अमिताभ बच्चन के करियर का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट (मील का पत्थर) साबित हुई।
साल 1975 में यश चोपड़ा द्वारा निर्देशित फिल्म दीवार उनके करियर के सबसे बेहतरीन अभिनय के लिए जानी जाती है।
साल 1975 में आयी फिल्म शोले भारतीय सिनेमा के इतिहास की सबसे बड़ी ब्लॉकबस्टर फिल्मों में से एक है। जय के रूप में अमिताभ के शांत, गंभीर और वफादार दोस्त के किरदार ने दर्शकों के दिलों को छू लिया।
साल 1978 में आयी फिल्म डॉन में अमिताभ बच्चन के दोहरे किरदार (विजय और डॉन) और स्टाइल ने उन्हें एक अलग स्वैग दिया।
साल 1981 में आयी फिल्म सिलसिला यश चोपड़ा की इस फिल्म ने अमिताभ की एंग्री यंग मैन वाली छवि से हटकर उनके भीतर के एक संवेदनशील, प्रेमी और शायराना कलाकार को बाहर निकाला।
साल 1990 में आयी फिल्म अग्निपथ में विजय दीनानाथ चौहान के रूप में उनकी भारी और बदली हुई आवाज, बैठने का स्टाइल और आंखों की आक्रामकता ने हर किसी को हैरान कर दिया।
साल 2016 में आयी फिल्म पिंक में एक रिटायर्ड वकील के रूप में महिलाओं की सहमति (No Means No) पर दमदार बहस ने फैंस को अमिताभ बच्चन का दीवाना बना दिया था।