सिमरन सिंह
जब AI बिना सही जानकारी के भी ऐसा जवाब देता है जो सुनने में बिल्कुल सही लगे, उसे AI Hallucination कहा जाता है।
2026 Stanford HAI AI Index के मुताबिक, अलग-अलग AI मॉडल्स में गलत जानकारी देने की दर 22% से 94% तक पाई गई।
गलत जानकारी
पुराने डेटा का इस्तेमाल
फर्जी सोर्स देना
एक ही बात दोहराना
सच्ची और झूठी बातों को मिलाना
AI के जवाब को अंतिम सच न मानें। Google और Google Scholar पर जाकर जानकारी को क्रॉस-चेक जरूर करें।
AI से पूछें: "इस जानकारी का स्रोत क्या है?", "तुम ऐसा क्यों कह रहे हो?" इससे उसकी कमियां सामने आ सकती हैं।
एक ही सवाल ChatGPT, Gemini और Claude जैसे प्लेटफॉर्म्स पर पूछें। अगर जवाब अलग हों, तो अतिरिक्त जांच जरूरी है।
AI हमेशा रियल-टाइम जानकारी नहीं देता। खासकर खबरों और आंकड़ों के मामले में अपडेटेड जानकारी की पुष्टि जरूर करें।
AI अगर किसी रिसर्च पेपर या रिपोर्ट का नाम ले, तो खुद उसे खोलकर पढ़ें। कई बार AI फर्जी रेफरेंस भी बना सकता है।
अगर कोई जवाब बहुत अजीब, असामान्य या जरूरत से ज्यादा आत्मविश्वासी लगे, तो उसे दोबारा जांचें।