Ulhasnagar water crisis (सोर्सः सोशल मीडिया) 
ठाणे

उल्हासनगर मनपा: जनप्रतिनिधियों की पहली आमसभा में पानी की किल्लत को लेकर हंगामा, एमआईडीसी के बकाया बिल पर चर्चा

Ulhasnagar Water Crisis: उल्हासनगर मनपा की पहली आमसभा में जल संकट और एमआईडीसी के 1,089 करोड़ रुपये बकाया बिल को लेकर हंगामा हुआ, पार्षदों ने पानी शुल्क बढ़ाने के प्रस्ताव का कड़ा विरोध किया।

आंचल लोखंडे

Ulhasnagar Municipal Corporation: शुक्रवार को उल्हासनगर मनपा की पहली विशेष आमसभा में जल संकट का मुद्दा प्रमुख रहा। सभी दलों के नगरसेवकों ने जल आपूर्ति की समस्या के बावजूद मनपा प्रशासन द्वारा जल शुल्क बढ़ाने के प्रस्ताव की कड़ी आलोचना की। महापौर अश्विनी निकम तथा उपमहापौर अमर लुंड की उपस्थिति में आयोजित बैठक में सभी नवनिर्वाचित सदस्यों ने मांग की कि पहले शहरवासियों को स्वच्छ और नियमित जल आपूर्ति सुनिश्चित की जाए, उसके बाद ही शुल्क वृद्धि पर विचार किया जाए।

महासभा के दौरान प्रशासन ने विभिन्न निर्माण कार्यों के लिए जल दरों और अन्य नागरिक सेवा शुल्कों में वृद्धि का प्रस्ताव रखा था। हालांकि, जल आपूर्ति की दयनीय स्थिति और बकाया भुगतानों को देखते हुए यह प्रस्ताव अस्वीकृत होने की संभावना जताई गई।

पार्षदों ने पानी बिल वृद्धि के प्रस्ताव का किया कड़ा विरोध

महासभा में प्रशासन की ओर से बताया गया कि मनपा पर एमआईडीसी का लगभग 1,089 करोड़ रुपये का पानी बिल बकाया है। अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया कि प्रति वर्ष लगभग 34 करोड़ रुपये जल कर के रूप में देने पड़ते हैं। हालांकि, जब यह खुलासा हुआ कि मनपा प्रशासन ने पिछले दस महीनों से पानी का बिल नहीं भरा है, तो सभा में हंगामा मच गया।

कई पार्षदों ने आशंका जताई कि यदि बकाया बिलों के कारण एमआईडीसी द्वारा पानी की आपूर्ति बंद कर दी गई तो शहर में गंभीर स्थिति उत्पन्न हो सकती है। इस दौरान भाजपा के नगरसेवक संजय सिंह ने समिति अध्यक्षों और वार्ड समितियों के चुनाव कराए बिना बैठक बुलाए जाने पर आपत्ति जताते हुए इसे अवैध बताया। शिवसेना के जमनु पुरस्वानी और भाजपा के वरिष्ठ नगरसेवक राजेश वधारिया ने पानी के शुल्क में वृद्धि की आवश्यकता पर सवाल उठाया।

असमंजस में प्रशासन

मनपा में कांग्रेस की इकलौती सदस्य अंजली सालवे, वंचित बहुजन अघाड़ी के विकास खरात और अन्य पार्षदों ने मांग की कि शुल्क वृद्धि से पहले पानी की गुणवत्ता में सुधार किया जाए। पार्षदों ने आयुक्त सहित संबंधित अधिकारियों से पूछा कि पानी का बिल नियमित रूप से क्यों नहीं चुकाया गया और बकाया इतना अधिक क्यों बढ़ गया। संतोषजनक जवाब न मिलने के कारण प्रशासन असमंजस में दिखाई दिया। शहर में बढ़ते पानी संकट, बकाया बिलों और प्रस्तावित शुल्क वृद्धि के कारण उल्हासनगर में पानी का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में आ गया है।

आपत्तियों के बाद प्रस्तावित मूल्य वृद्धि में संशोधन

आरसीसी पर कर को 3,600 से बढ़ाकर 8,000, बैरकों पर 1,800 से बढ़ाकर 6,500 और झुग्गी-झोपड़ियों पर 1,200 से बढ़ाकर 3,000 करने के प्रस्ताव पर आपत्तियां उठाई गईं। लंबी बहस के बाद संशोधित दरों के अनुसार आरसीसी पर कर 4,400, बैरकों पर 2,300 और झुग्गी-झोपड़ियों पर 1,500 निर्धारित किया गया। जबकि संपत्ति कर में प्रस्तावित 10 प्रतिशत वृद्धि को पूरी तरह अस्वीकार कर दिया गया।

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