Maharashtra Zilla Parishad: जिला परिषद स्तर पर प्रशासनिक लापरवाही और अधिकारियों कर्मचारियों द्वारा आवेदनों एवं सेवा संबंधी मामलों में की जा रही अनावश्यक देरी पर मुंबई उच्च न्यायालय की नागपुर खंडपीठ ने कड़ा रुख अपनाया है। न्यायालय ने पाया कि कर्मचारियों के तबादले, सेवा संबंधी आवेदन और विभिन्न निवेदनों पर महीनों तक निर्णय नहीं होने के कारण बड़ी संख्या में याचिकाएं न्यायालय में पहुंच रही हैं। इस पर गंभीर टिप्पणी करते हुए न्यायालय ने राज्य सरकार को प्रभावी व्यवस्था विकसित करने के निर्देश दिए हैं।
न्यायालय की टिप्पणी के बाद ग्राम विकास विभाग ने राज्य के सभी मुख्य कार्यकारी अधिकारियों (सीईओ), उपमुख्य कार्यकारी अधिकारियों (सामान्य), शिक्षा अधिकारियों तथा संबंधित अधिकारियों को तत्काल निर्देश जारी किए हैं। आदेश के अनुसार जिला परिषद और पंचायत समिति स्तर पर प्राप्त सभी आवेदन, शिकायतें और निवेदन महाराष्ट्र शासकीय कर्मचारी कर्तव्यों में विलंब निवारण अधिनियम, 2005 के तहत सात कार्य दिवस के भीतर अनिवार्य रूप से निपटाए जाएंगे।
सरकार ने विशेष रूप से शिक्षकों और कर्मचारियों के स्थानांतरण से जुड़े मामलों के लंबे समय तक प्रलंबित रहने पर नाराजगी व्यक्त की है। ऐसे मामलों के कारण बड़ी संख्या में न्यायालय में याचिकाएं दायर हो रही हैं। सरकार ने स्पष्ट किया है कि बिना कारण फाइलें प्रलंबित रखने वाले अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी तथा इसकी नोंद उनके गोपनीय प्रतिवेदन (सीआर) में भी की जाएगी।
नए निर्देशों के अनुसार प्रत्येक जिला परिषद में प्रलंबित आवेदनों की समीक्षा के लिए हर = सोमवार विशेष बैठक आयोजित की जाएगी। समय सीमा में निर्णय नहीं लेने वाले अधिकारियों - की जिम्मेदारी तय की जाएगी। साथ ही इन आदेशों के पालन की रिपोर्ट आत दिनों के भीतर - राज्य सरकार को भेजना अनिवार्य किया गया है। उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार को चार सप्ताह के भीतर आवश्यक कार्रवाई कर अनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। - मामले की अगली सुनवाई 25 अगस्त को निर्धारित की गई है।