World Brain Tumor Day 2026: 8 जून की तारीख का दिन दुनिया भर में ‘वर्ल्ड ब्रेन ट्यूमर डे’ को समर्पित किया गया है। इसका उद्देश्य है- ब्रेन ट्यूमर के बारे में लोगों को जागरूक करना।
‘विश्व ब्रेन ट्यूमर दिवस’ को जर्मन ब्रेन ट्यूमर एसोसिएशन द्वारा वर्ष 2000 में पहली बार आम जनता में ब्रेन ट्यूमर के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए इस दिन की शुरुआत की थी। यह संगठन वैज्ञानिकों और हेल्थ प्रोफेशनल के अलावा ब्रेन ट्यूमर के मरीजों और उनके परिवार के सदस्यों को भी सहायता प्रदान करता है। मस्तिष्क का ये ट्यूमर सिर्फ वयस्कों ही नहीं, बल्कि बच्चों में भी होता है।
ट्यूमर एक तरह का गांठ या असामान्य रूप से बढ़ी हुई कोशिकाएं होती हैं। शरीर में मुख्य रूप से दो तरह के ट्यूमर्स होते हैं, बिनाइन और मैलिग्नेंट। यदि ट्यूमर में कोशिकाएं सामान्य हैं, तो यह बिनाइन ट्यूमर है। बिनाइन ट्यूमर तब होता है, जब अंदर ही अंदर कुछ गलत होता है, जिससे कोशिकाएं बढ़ जाती हैं और गांठ बन जाते हैं। यदि कोशिकाएं असामान्य और अनियंत्रित रूप से बढ़ने लगती हैं, तो वे कैंसर का रूप ले लेती हैं।
इसे कैंसर रहित ब्रेन ट्यूमर कहा जाता है, जो ब्रेन में धीरे धीरे ग्रो करने लगता हैं। उचित साइज़ और सही स्थान पर होने पर इस तरह के ट्यूमर को आसानी से रिमूव किया जा सकता है। सर्जरी के बाद पेशेंट 15 से 20 साल की जिंदगी आसानी से जी सकता है।
इस तरह के ब्रेन ट्यूमर को प्राईमरी ब्रेन ट्यूमर कहा जाता है। इसमें व्यक्ति सर्जरी के बाद 2 से 3 साल तक ही जीवित रह पाता है। वे लोग जो इस रोग से ग्रस्त होने पर सर्जरी नहीं करवाते हैं, उनमें उल्टी, सिरदर्द, सीजर अटैक और उठने बैठने की तकलीफ का सामना करना पड़ता है।
वे लोग जो मेटास्टेसिस ट्यूमर से ग्रस्त होते हैं, उनमें ये समस्या लंग कैंसर, लीवर कैंसर और ब्रेस्ट कैंसर के कारण बढ़ने लगती है। इस समस्या से पीडित लोगों में कैंसर के कारण ये सेल्स ब्रेन तक पहुंचकर उसे डैमेज करने लगते हैं। ये ट्यूमर किसी अन्य बीमारी के कारण ब्रेन में डेवल्प होने लगता है।
ये भी पढ़ें- क्या है Monk Fruit? जीरो कैलोरी वाला यह स्वीटनर डायबिटीज मरीजों के लिए माना जाता है बेहतर विकल्प
यदि शुरुआती चरण में बीमारी की पहचान हो जाए तो इलाज की सफलता की संभावना काफी हद तक बढ़ जाती है। आधुनिक तकनीकों, उन्नत सर्जरी, रेडियोथेरेपी और दवा व उपचार की मदद से कई मरीजों को नया जीवन मिल रहा है।